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संपूर्ण योग का अर्थ – ब्रह्माकुमारीज समाज सेवा प्रभाग (RERF).

संपूर्ण योग का अर्थ
आज 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है जैसे ही योग शब्द हमारे मन में आता है अधिकतर लोग योग से तात्पर्य केवल आसन ,प्राणायाम को ही योग समझते हैं। किंतु यह योग का बाहरी पक्ष या यूं कहें दूसरा पक्ष है। योग के दो स्तर होते हैं -आंतरिक व बाहरी स्तर। बाहरी स्तर जिसके हम चर्चा कर चुके हैं। योग के अंतरिक पक्ष का अर्थ है –
मानसिक शक्ति या
आत्मिक शक्ति।

• जिस प्रकार किसी भी मजबूत इमारत का आधार की नींव होती है ।
• जिस प्रकार किसी भी विशाल वृक्ष को आंधी और तूफान में टूटने या बिखरने से उसकी जड़े ही उसको बचाती हैं ।
• जिस प्रकार बड़े से बड़े हवाई जहाज, ट्रेन ,बस ,ट्रक आदि वाहन को चलाने के लिए एक अनुभवी चालक (ड्राइवर) की आवश्यकता होती है।
• उसी प्रकार जब तन और मन दोनों स्वस्थ होते हैं तभी इंसान के जीवन की यात्रा सुख, शांति और समृद्धि से पूर्ण होती है।
• वरना मानसिक शक्ति की कमी या दुर्बलता के कारण तन हष्ट -पुष्ट होते हुए भी वह चिंता ,तनाव, डिप्रेशन आदि के कारण स्वयं के जीवन को और दूसरों के जीवन को नुकसान पहुंचाता है ।
• योग अर्थात तन + मन जब दोनों स्वस्थ हो तभी यह संपूर्ण योग होगा।
• प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा योग की संपूर्ण परिभाषा को सार्थक किया जाता है।
• यहां जो राजयोग सिखाया जाता है वह न केवल तन अपितु आत्मा या मन को भी शक्तिशाली बनाता है।
• जिससे मन की समस्त बीमारियां चिंता ,तनाव, बेचैनी, घबराहट, अशांति, अकेलापन, भय ,आशंका आदि दूर होती हैं ।
• राजयोग सशक्त मन का निर्माण करता है । व्यक्ति को विपरीत हालातों में भी कमजोर नहीं होने देता। ऐसा सशक्त मन वाला व्यक्तित्व स्वयं और अपने परिवार की रक्षा विपरीत परिस्थितियों में घर परिवार में धैर्य और शांति बनाए रखता है ।
• ऐसे संपूर्ण योग का संबंध किसी धर्म से नहीं है।
• स्वस्थ तन और स्वस्थ मन आज सब की परम आवश्यकता है ।
• तो आइए ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा सिखाए जा रहे राजयोग को अपने जीवन का अंग बनाएं।
*राजयोग को जीवन में अपनाएं,
बदले में स्वस्थ तन -मन का उपहार पाए।*
• ओम शांति

योग दिवस पर हमारी विचार अभिव्यक्ति के साथ आप सभी को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर समाज सेवा प्रभाग की ओर से बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं। आप और हम सभी तन- मन से स्वस्थ रहकर स्वस्थ भारत का निर्माण करें। ओम शांति।
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